सावन में भगवान शिव जी की पूजा कैसे करें ? सावन में महादेव भोलेनाथ शंकर को प्रसन्न करने का आसान उपाय।

Savan Me Shiv Ji Ki Pooja Kaise Kare. Bhagvan Shankar 

अपने महादेव शिव जी तो बहुत ही भोले है वह एक बेल पत्र से भी आसानी से प्रसन्न हो जाते है बस मन मे सच्ची श्रद्धा होनी चाहिए। सावन का महीना भगवान शंकर को बहुत ही प्रिय है इस महीने में यदि आप उनकी पूजा और आराधना सच्चे मन से करते हो तो वह आपकी सभी मनोकामनाये पूर्ण कर देते है।

देवो के देव महादेव जी के बारे में कहा जाता है कि वह सावन के महीने में पृथ्वी पर आते है और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते है। सावन के महीने को श्रावण मास भी कहते है यह शिव जो को बहुत ही प्रिय है।

सावन में शिव जी की पूजा कैसे करें?

भगवान शिव को भोलेनाथ भी कहा जाता है उनकी पूजा और आराधना करने के लिए आपको बहुत कर्मकांड करने की जरूरत नही है बस आपके मन मे उनके प्रति भक्ति का भाव होना चाहिए। सावन में शिव जी की पूजा करने के लिए आपको प्रतिदिन यदि यह संभव न हो तो सावन के प्रत्येक सोमवार को अपने घर के आस-पास जो शिवालय हो वंहा जाकर या घर पर ही शंकर जी के ऊपर जल चढ़ाना चाहिए। जलाभिषेक करते हुए "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करते रहना चाहिए। शंकर जी को बेल पत्र बहुत ही प्रिय है इसलिए सावन के प्रत्येक सोमवार को शिव जी पर जलाभिषेक करने के बाद उन पर बेल पत्र, फूल और फल अर्पित करे धतूरा और भांग भी चढ़ा सकते हो क्योंकि मान्यता है कि यह भी भोलेनाथ को प्रिय है। उसके बाद चंदन का टीका लगाए अक्षत अर्पण करें और नीचे दिए हुए मंत्र का पाठ करते हुए भगवान शंकर की स्तुति कीजिये।

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम् ।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि ।।

यह मंत्र बहुत शाक्तिशाली है इसमें भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना की गयी है। इस कर्पूरगौरं मंत्र के द्वारा प्रतिदिन भगवान शिव जी की आराधना करने से वह प्रसन्न होते है और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते है।

भोलेनाथ की स्तुति करने के बाद उनकी आरती कीजिये उसके लिए धूप बत्ती और घी के दीपक का उपयोग करे। यह सब करने के बाद शिवलिंग के सामने सर झुकाकर उनसे क्षमा प्रार्थना करें जैसे कि हे महादेव मैं आपका भक्त हूँ यदि मुझसे इस जिंदगी में भूलवश कुछ पाप हो गए हो या गलतियां हो गयी हो तो उसके लिए हमे क्षमा करना और अपनी कृपा बरसाते रहना और अपने लिये आशीर्वाद की कामना करें अन्त में शिवलिंग के सामने साष्टांग दंडवत प्रणाम करें।

सावन का महीना इतना विशेष क्यों है ?

सावन के इतना विशेष होने के कई कारण है। भगवान शंकर जी का प्रथम विवाह दक्ष प्रजापति की पुत्री देवी सती से हुआ था वह शिव जी को बहुत प्रिय थी एक बार राजा दक्ष ने एक यज्ञ किया जिसमें भोलेनाथ को नही बुलाया जिससे नाराज होकर देवी सती ने उसी यज्ञ वेदी में भस्म होकर अपना देह त्याग दिया था। यह बात जैसे ही शंकर जी को पता चलती है वह वीरभद्र को भेजते है जो उस यज्ञ का विध्वन्स कर देता है और राजा दक्ष का सार काट देता है।

बाद में सब देवताओं के अनुनय-विनय करने पर वह सभी को क्षमा कर देते है। राजा दक्ष के नगरवासियों की प्रार्थना पर वह वचन देते है कि एक महीने पृथ्वी पर आकर निवास करेंगे और सावन यही वह महीना है जब हमारे प्यारे भोलेनाथ पृथ्वी पर हम लोगो के साथ रहने आते है और हम उनकी कृपा आसानी से प्राप्त कर पाते है।

एक दूसरी कथा के अनुसार कालो के काल महाकाल भगवान शिव जी ने विषपान किया था और उनकी ऊर्जा भी बहुत ही प्रचंड है। सावन के महीने में बारिश होती है चारो तरफ हरियाली होती है यह उन्हें शीतलता प्रदान करता है इसी लिए सावन का महीना शंकर जी को बहुत ही प्रिय है। ज्येष्ट शुक्ल एकादशी के बाद भगवान नारायण चार माह के लिए शयन करते है ऐसे में सारा भार भगवान शंकर पर ही रहता है इसलिए भी पृथ्वीवाशी विशेष कृपा पाने के लिए उनकी पूजा अर्चना करते है।

भगवान शंकर को प्रसन्न कैसे करें?

आदि भी जो है और अंत भी ऊपर भी जो है और नीचे भी हर दिशा हर कंकर में जो है वह शंकर है वही शिवाय है। आप दुनिया से बाते छुपा सकते हो लेकिन उस ईश्वर से नही जो हर जगह बसता है। भगवान शंकर को प्रशन्न करने के लिए आपको कोई बहुत कठिन तप या जप करने की जरूरत नही है वह बहुत भोले है देवो के देव महादेव है एक लोटे जल और बेल पत्र से ही खुश हो जाते है लेकिन इसमें भी एक शर्त है कि भोलेनाथ के साथ चीटिंग नही चलती वह सब जानते है उनसे कुछ छुपा नही सकते हो आप इसलिए यदि आपके मन मे उनके प्रति सच्चा लगाव और श्रद्धा है तभी वह प्रशन्न होते है।

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