अधजल गगरी छलकत जाए का मतलब उदाहरण सहित समझाइये

"अधजल गगरी छलकत जाए" एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है, जिसका शाब्दिक अर्थ है कि आधी भरी गगरी (मटका) छलक जाती है। इसका भावार्थ यह है कि अल्प ज्ञान या अधूरी जानकारी रखने वाला व्यक्ति अक्सर अपनी सीमित जानकारी का दिखावा करता है और अधिक बोलता है।

**उदाहरण:**

1. **शिक्षा में:** किसी कक्षा में एक छात्र ने थोड़ी सी जानकारी प्राप्त की है और वह बार-बार उस जानकारी को लेकर चर्चा करता है, ताकि लोग यह समझें कि वह बहुत ज्ञानी है। तब कहा जा सकता है, "अधजल गगरी छलकत जाए, यह बच्चा थोड़ी सी जानकारी के साथ ही इतना दिखावा कर रहा है।"

2. **कार्यस्थल पर:** किसी नए कर्मचारी को थोड़ी सी ट्रेनिंग मिली है और वह अपने वरिष्ठों के सामने खुद को बहुत बड़ा जानकार दिखाने की कोशिश कर रहा है। तब उसके बारे में कहा जा सकता है, "वह अधजल गगरी छलकत जाए की तरह व्यवहार कर रहा है।"

3. **सामाजिक स्थिति में:** किसी व्यक्ति को किसी विषय के बारे में थोड़ी जानकारी है और वह हर जगह उस जानकारी को बताते हुए अपनी धाक जमाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे व्यक्ति के बारे में कहा जा सकता है, "अधजल गगरी छलकत जाए, इस व्यक्ति को थोड़ा सा ज्ञान मिला है और वह हर जगह उस ज्ञान का प्रदर्शन कर रहा है।"

इस मुहावरे का उपयोग उन लोगों के लिए किया जाता है जो अधूरी जानकारी या आधे-अधूरे ज्ञान के साथ अधिक दिखावा करते हैं।
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